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शिशॠके छह माह से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होते ही, हर माता-पिता का चिंता होती है कि उसे सॉलिड फूड में कà¥à¤¯à¤¾ दिया जाà¤à¥¤ साथ ही उनका यह सोचना à¤à¥€ जायज है कि उसे जो à¤à¥€ दिया जाà¤, वो पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ता से à¤à¤°à¤ªà¥‚र होना चाहिà¤à¥¤ मॉमजंकà¥à¤¶à¤¨ के इस आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल में हम पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ से à¤à¤°à¤ªà¥‚र à¤à¤¸à¥‡ ही à¤à¤• खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ के बारे में बात करेंगे। इसे आम à¤à¤¾à¤·à¤¾ में मकà¥à¤•ा, मकई या कॉरà¥à¤¨ कहा जाता है। यहां आप जानेंगे कि इसे शिशॠके आहार में शामिल करना चाहिठया नहीं। साथ ही लेख के अंत में हम मकई की कà¥à¤› सà¥à¤µà¤¾à¤¦à¤¿à¤·à¥à¤Ÿ रेसिपी à¤à¥€ बताà¤à¤‚गे।
आइà¤, सबसे पहले यह जान लेते हैं कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठकॉरà¥à¤¨ का सेवन सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ है या नहीं।
कà¥à¤¯à¤¾ मकई बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठसà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ है?
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठमकई सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ है या नहीं ये बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की उमà¥à¤° और उनके खिलाठजाने के तरीके पर निरà¥à¤à¤° कर सकता है। वहीं, बचà¥à¤šà¥‡ के आहार में अगर मकई शामिल करना चाहते हैं, तो 6 माह से बड़े बचà¥à¤šà¥‡ के आहार में पका हà¥à¤† मकà¥à¤•ा शामिल किया जा सकता है, लेकिन इसे पीसकर ही देना चाहिठ(1)। à¤à¤• अनà¥à¤¯ रिसरà¥à¤š में बताया गया है कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के आहार में दूध के अलावा मकई को शामिल कर सकते हैं। इससे बचà¥à¤šà¥‡ की दूध पर निरà¥à¤à¤°à¤¤à¤¾ कम हो सकती है। इसी शोध के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, मकई में परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ और कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ पाया जाता है, जो बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठबेहतरीन आहार माना जा सकता है, लेकिन इसमें अनà¥à¤¯ पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी होती है (2)।
धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे, बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के आहार में मकई की सीमित मातà¥à¤°à¤¾ ही शामिल करें, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि कà¥à¤› शोध में इस बात का à¤à¥€ जिकà¥à¤° मिलता है कि मकई बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में फà¥à¤¯à¥‚मोनिसिन (fumonisin) नामक विषाकà¥à¤¤ बीमारी का कारण बन सकती है (3)।
आगे आप जानेंगे कि छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को मकई खिलाने का सही समय कà¥à¤¯à¤¾ है।
बचà¥à¤šà¥‡ के आहार में मकई कब और कैसे शामिल करें?
à¤à¤• शोध के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• नवजात शिशà¥à¤“ं के छह महीने का होने तक सिरà¥à¤« सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ ही कराना चाहिठ(4)। छह महीने के बाद उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सॉलिड फूड के सेवन की सलाह दी जाती है, जिसमें मकई à¤à¥€ शामिल है (1)। वहीं, अगर मकई का सेवन कराने के दौरान बचà¥à¤šà¥‡ को मकई से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो या अपच हो जाà¤, तो इसका सेवन फौरन रोक दें और डॉकà¥à¤Ÿà¤° से सलाह लें। इसलिà¤, à¤à¤¸à¤¾ माना जाता है कि à¤à¤• वरà¥à¤· से अधिक उमà¥à¤° के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को मकई देना फायदेमंद होता है।
यहां हम शिशॠको मकई खिलाने के कà¥à¤› तरीके बता रहे हैं-
◠मकई की पà¥à¤¯à¥‚री बनाकर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को खिला सकते हैं।
◠अगर बचà¥à¤šà¤¾ दो साल या उससे थोड़ा बड़ा है, तो उसे मकà¥à¤•े के दाने उबालकर दे सकते हैं, लेकिन इसका धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि शिशॠमकई के दाने चबा पा रहा है या नहीं।
◠मकई के दानों को मैश करके à¤à¥€ शिशॠको खिला सकते हैं।
नोट: अगर शिशॠको पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ से यà¥à¤•à¥à¤¤ सॉलिड खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ देने की बात हो, तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° मकई की जगह अनà¥à¤¯ चीजें देने की सलाह देते हैं। सिरà¥à¤« मकई का छोटा-सा à¤à¤¾à¤— डाइट में शामिल करने की बात कहते हैं।
आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल में आगे जानिठकि किन गà¥à¤£à¥‹à¤‚ के चलते मकई का सेवन किया जाता है।
मकई के पोषक ततà¥à¤µ
यहां हम पà¥à¤°à¤¤à¤¿ 100 गà¥à¤°à¤¾à¤® मकई के पोषक ततà¥à¤µ और उनकी मातà¥à¤°à¤¾ के बारे में विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से बता रहे हैं, जो इस पà¥à¤°à¤•ार हैं (5)।
पà¥à¤°à¤¤à¤¿ 100 गà¥à¤°à¤¾à¤® मकई में 76 गà¥à¤°à¤¾à¤® पानी, 3.27 गà¥à¤°à¤¾à¤® पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨, 86 कैलोरी, 18.7 गà¥à¤°à¤¾à¤® कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ, 6.85 गà¥à¤°à¤¾à¤® शà¥à¤—र (NLEA), 2.0 गà¥à¤°à¤¾à¤® फाइबर (टोटल डायटरी) व 3.43 गà¥à¤°à¤¾à¤® गà¥à¤²à¥‚कोज मौजूद होता है।
वहीं मिनरल की बात करें, तो 100 गà¥à¤°à¤¾à¤® मकई में 2 मिलीगà¥à¤°à¤¾à¤® कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, 37 मिलीगà¥à¤°à¤¾à¤® मैगà¥à¤¨à¥€à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, 0.52 मिलीगà¥à¤°à¤¾à¤® आयरन, 89 मिलीगà¥à¤°à¤¾à¤® फासà¥à¤«à¥‹à¤°à¤¸, 15 मिलीगà¥à¤°à¤¾à¤® सोडियम, 270 मिलीगà¥à¤°à¤¾à¤® पोटेशियम, 0.054 मिलीगà¥à¤°à¤¾à¤® कॉपर, 0.46 मिलीगà¥à¤°à¤¾à¤® जिंक और 0.6 माइकà¥à¤°à¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤® सिलेनियम होता है।
इसके अलावा 100 गà¥à¤°à¤¾à¤® मकई में विटामिन à¤à¥€ होते हैं, जिनमें 6.8 मिलीगà¥à¤°à¤¾à¤® विटामिन-सी, 9 माइकà¥à¤°à¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤® विटामिन-à¤, 0.07 मिलीगà¥à¤°à¤¾à¤® विटामिन-ई, 187 आईयू विटामिन-à¤, 0.3 माइकà¥à¤°à¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤® विटामिन-के और 0.093 मिलीगà¥à¤°à¤¾à¤® विटामिन-बी6 शामिल है।
इसके साथ ही, मकई की पà¥à¤°à¤¤à¤¿ 100 गà¥à¤°à¤¾à¤® मातà¥à¤°à¤¾ में 42 माइकà¥à¤°à¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤® फोलेट, 0.325 गà¥à¤°à¤¾à¤® फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡ (सैचà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡), 0.432 गà¥à¤°à¤¾à¤® फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡ (मोनोअनसैचà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡) और 0.487 गà¥à¤°à¤¾à¤® फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡ (पॉलीअनसैचà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡) à¤à¥€ पाठजाते हैं।
कà¥à¤¯à¤¾ आप जानना चाहेंगे कि मकई किसी लिहाज से बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठफायदेमंद है, तो पढ़ें लेख का अगला à¤à¤¾à¤—।
शिशॠको मकà¥à¤•ा खिलाने के फायदे
यहां हम शिशॠको मकà¥à¤•ा खिलाने के फायदों के बारे में विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से बता रहे हैं, जो इस पà¥à¤°à¤•ार हैं:
वजन बढ़ना : ऊरà¥à¤œà¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करने के लिठमकई सरà¥à¤µà¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤® खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ में से à¤à¤• है। जिन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का वजन कम होता है, उनके आहार में कैलोरी की मातà¥à¤°à¤¾ बढ़ाने के लिठमकई का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कर सकते हैं। à¤à¤• शोदà¥à¤¯ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, मकई में कैलोरी और कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में पाठजाते हैं (6), जो शिशॠका वजन बढ़ाने में कारगर हो सकते हैं।
आंखों की रोशनी : आंखों और तà¥à¤µà¤šà¤¾ के लिठमकई फायदेमंद हो सकती है। इस बात की जानकारी à¤à¤¨à¤¸à¥€à¤¬à¥€ (National Center For Biotechnology Information) की वेबसाइट पर पबà¥à¤²à¤¿à¤¶ à¤à¤• रिसरà¥à¤š पेपर से मिलती है। शोध के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, पीले मकई के दानों में कैरोटीनोइड नामक पदारà¥à¤¥ मौजूद होता है, जो आंखों की रोशनी के लिठलाà¤à¤•ारी हो सकता है (7)।
मजबूत मांसपेशियां : फासà¥à¤«à¥‹à¤°à¤¸ हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को मजबूत करने में मददगार होता है, जो मकई में परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में पाया जाता है। यही नहीं मकई में पाया जाने वाला मैगà¥à¤¨à¥€à¤¶à¤¿à¤¯à¤® मांसपेशियों à¤à¤µà¤‚ तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा तंतà¥à¤° के लिठफायदेमंद हो सकता है।
पाचन में सà¥à¤§à¤¾à¤° : अगर बचà¥à¤šà¥‡ को पाचन या कबà¥à¤œ की शिकायत है, तो मकई उसके लिठफायदेमंद साबिक हो सकती है। इसमें फाइबर होता है, जो कबà¥à¤œ से राहत दिला सकता है। इसलिà¤, बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को मकई के आटे से बनी चीज खिलाने से लाठहो सकता है (8)।
सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रकà¥à¤¤ कोशिकाà¤à¤‚ : मकई में à¤à¤‚टीऑकà¥à¤¸à¥€à¤¡à¥‡à¤‚ट होता है, जो कोशिकाओं को कà¥à¤·à¤¤à¤¿à¤—à¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ होने से बचा सकता है। साथ ही ये शरीर में टिशà¥à¤¯à¥‚ और डीà¤à¤¨à¤ कà¥à¤·à¤¤à¤¿ को रोकने में à¤à¥€ मददगार हो सकता है।
शरीर की वृदà¥à¤§à¤¿ और विकास: मकई में कई पà¥à¤°à¤•ार के मिनरल और विटामिन होते हैं, जो शिशॠके विकास में सहायक होते हैं। खासकर, इसमें बी कॉमà¥à¤ªà¥à¤²à¥‡à¤•à¥à¤¸ होता है, जिसके सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ लाठनिमà¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार के हो सकते हैं:
यह तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा तंतà¥à¤° और मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• के विकास में सहायता कर सकता है।
यह शरà¥à¤•रा, पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ और फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡ के चयापचय में सà¥à¤§à¤¾à¤° कर सकता है।
साथ ही नई कोशिका के विकास में मदद कर सकता है।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ और मकई खिलाने से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ अनà¥à¤¯ जानकारी के लिठआप अंत तक इस आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल को जरूर पढ़ें।
शिशॠको मकà¥à¤•ा खिलाने के नà¥à¤•सान
जहां à¤à¤• ओर मकà¥à¤•े के ढेरों फायदे हैं, वहीं दूसरी ओर इसके कà¥à¤› नà¥à¤•सान à¤à¥€ हैं, जिनके बारे में नीचे बताया गया है(3)।
लेख में बताया गया है कि मकई में उचà¥à¤š मातà¥à¤°à¤¾ में फाइबर पाया जाता है (5)। इसके कारण मकई को अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में खिलाने से शिशà¥à¤“ं को पेट में दरà¥à¤¦, कबà¥à¤œ और पेट फूलने जैसी समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है (9)।
कॉरà¥à¤¨ का जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सेवन शरीर में पेलागà¥à¤°à¤¾ (विटामिन-बी3 की कमी) को पैदा कर सकता है। इसके कारण शिशॠको दसà¥à¤¤ और तà¥à¤µà¤šà¤¾ रोग हो सकते हैं (10)।
मकई में गà¥à¤²à¥‚टेन à¤à¥€ पाया जाता है, जो शिशॠकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ में à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ का कारण बन सकता है (11)।
मकà¥à¤•ा आधारित खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का सेवन करने वाले शिशà¥à¤“ं में फà¥à¤¯à¥‚मोनिसिन (fumonisin) नामक विषाकà¥à¤¤ बीमारी होने का खतरा जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होता है (3)।
लेख में जाने मकई को लेते वकà¥à¤¤ किन बातों का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें।
मकई कैसे चà¥à¤¨à¥‡à¤‚ और इसे सà¥à¤Ÿà¥‹à¤° कैसे करें?
जब आप ये जान लें कि आपके बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठकॉरà¥à¤¨ के सेवन से किसी तरह की कोई à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ नहीं है तो इसे आप बाजार से खरीद सकते हैं। नीचे आपको बाजार से अचà¥à¤›à¥€ मकई चà¥à¤¨à¤¨à¥‡ के लिठकà¥à¤› टिपà¥à¤¸ बताठगठहैं।
हमेशा ताजी मकई ही खरीदें, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि ताजा मकई खाने में लाà¤à¤•ारी होती है।
मकà¥à¤•ा लेते वकà¥à¤¤ इस बात का विशेष धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि उनके दाने मोटे और चमकदार हों। साथ ही दानों को दबाकर देखें, ताजी मकई के दाने कठोर होते हैं।
उस मकई का चयन करें, जिसका छिलका निकला हà¥à¤† न हो। सूखा छिलका बासी मकà¥à¤•ा होने का संकेत देता है।
मकई के ऊपरी हिसà¥à¤¸à¥‡ पर à¤à¥‚रे रंग के रेशे चमकदार और चिपचिपे होने चाहिà¤à¥¤
ताजी मकई का सेवन पहले तीन दिन के à¤à¥€à¤¤à¤° ही कर लें।
मकई को गरà¥à¤®à¥€ व सूरज की रोशनी से बचाकर रखना चाहिà¤à¥¤ इसमें पाया जाने वाला शरà¥à¤•रा सूरज की रोशनी के संपरà¥à¤• में आने से सà¥à¤Ÿà¤¾à¤°à¥à¤š में बदल सकता है।
आप मकई के दानों को à¤à¤¯à¤°à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤Ÿ डिबà¥à¤¬à¥‡ में बंद करके फà¥à¤°à¤¿à¤œ में सà¥à¤Ÿà¥‹à¤° कर सकते हैं।
ऑरà¥à¤—ेनिक मकई खरीदते वकà¥à¤¤ मकई के पैकेट पर लिखे गठनिरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥‹à¤‚ को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ से पढ़ें।
नीचे हम लेख में बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के आहार में मकई को शामिल करने के लिठकà¥à¤› पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• रेसिपी बताने जा रहे हैं।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठसà¥à¤µà¤¾à¤¦à¤¿à¤·à¥à¤Ÿ मकई रेसिपीज
छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठमकई का सेवन कितना फायदेमंद है, ये ऊपर लेख में बताया गया है। लेख के इस आखिरी à¤à¤¾à¤— में बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठसà¥à¤µà¥€à¤Ÿ कॉरà¥à¤¨ से बनी कà¥à¤› रेसिपी के बारे में बताने जा रहे हैं। इसे आप आसानी से अपने शिशॠके आहार में शामिल कर सकते हैं।
1. कदà¥à¤¦à¥‚ और मकई के आटे का दलिया
कदà¥à¤¦à¥‚ और मकई के आटे का दलिया
सामगà¥à¤°à¥€:
◠1 कप पानी
◠1 कप दूध
â— 1 कप कदà¥à¤¦à¥‚ की पà¥à¤¯à¥‚री
◠पीली मकई का आटा
â— 1 बड़ा चमà¥à¤®à¤š बà¥à¤°à¤¾à¤‰à¤¨ शà¥à¤—र
â— 1/2 छोटा चमà¥à¤®à¤š पीसा हà¥à¤† अदरक (वैकलà¥à¤ªà¤¿à¤•)
◠नमक
बनाने की विधि :
◠बरà¥à¤¤à¤¨ में कदà¥à¤¦à¥‚, दूध और पानी को à¤à¤• साथ मिला लें।
◠इसके बाद दूसरे बरà¥à¤¤à¤¨ में मकई के आटे को पानी के साथ मिलाकर पेसà¥à¤Ÿ बना लें। पेसà¥à¤Ÿ को अचà¥à¤›à¥‡ से फेट लें, ताकि गांठे न रह जाà¤à¤‚।
◠इसके बाद पैन में मकई के आटे का मिशà¥à¤°à¤£ कदà¥à¤¦à¥‚, दूध व पानी के साथ मिलाकर गरà¥à¤® करें। इसके बाद शकà¥à¤•र मिलाà¤à¤‚ और गाढ़ा होने तक हिलाते रहें।
◠अब इस पेसà¥à¤Ÿ में नमक और अदरक मिला दें।
◠गैस में इसे 3-5 मिनट तक पकने के लिठछोड़ दें।
◠समय पूरा होने के बाद इसे हलà¥à¤•ा गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¾ हो जाने के बाद शिशॠको खिलाà¤à¤‚।
2. गाजर, आलू व सà¥à¤µà¥€à¤Ÿ कॉरà¥à¤¨ पà¥à¤¯à¥‚री
गाजर, आलू व सà¥à¤µà¥€à¤Ÿ कॉरà¥à¤¨ पà¥à¤¯à¥‚री
सामगà¥à¤°à¥€ :
◠1 आलू
◠1 गाजर
â— 1 बड़ा चमà¥à¤®à¤š मटर के दाने
â— 2 बड़े चमà¥à¤®à¤š सà¥à¤µà¥€à¤Ÿ कॉरà¥à¤¨ के दाने
â— 1 छोटा चमà¥à¤®à¤š जैतून का तेल
â— 4 बड़े चमà¥à¤®à¤š पानी
बनाने की विधि :
◠पैन में तेल को गरà¥à¤® करें।
◠फिर उसमें बारीक कटी हà¥à¤ˆ गाजर डालें।
◠गाजर नरà¥à¤® होने के बाद उसमें आलू, मटर व सà¥à¤µà¥€à¤Ÿ कॉरà¥à¤¨ के दाने डाल दें और फिर पानी मिलाà¤à¤‚।
◠इस मिशà¥à¤°à¤£ को पà¥à¤¯à¥‚री बनाने के लिठकà¥à¤› देर तक उबालें और फिर धीमी आंच पर 15 मिनट तक पकाà¤à¤‚।
3. मकई के पकोड़े
मकई के पकोड़े
सामगà¥à¤°à¥€ :
◠आवशà¥à¤¯à¤•तानà¥à¤¸à¤¾à¤° वनसà¥à¤ªà¤¤à¤¿ तेल
â— 3 बड़े चमà¥à¤®à¤š दूध
â— 3 छोटे चमà¥à¤®à¤š सॉस
â— 1 कप सà¥à¤µà¥€à¤Ÿ कॉरà¥à¤¨
◠1 कप मैदा
बनाने की विधि :
◠मैदा और दूध को à¤à¤• साथ मिलाकर मिशà¥à¤°à¤£ बना लें।
◠इसके बाद सà¥à¤µà¥€à¤Ÿ कॉरà¥à¤¨ और सॉस को à¤à¤• साथ मिला लें।
◠थोड़ा-सा वनसà¥à¤ªà¤¤à¤¿ तेल पैन में डालकर गरà¥à¤® करें और फिर थोड़ा-थोड़ा करके उसमें मिशà¥à¤°à¤£ डालें।
◠पकाते वकà¥à¤¤ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हलà¥à¤•े से दबाà¤à¤‚ और तलें।
लेख के माधà¥à¤¯à¤® से बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के आहार में मकई का सेवन कब और कैसे करवाना चाहिà¤, इसकी विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से जानकारी दी गई है। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे, बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के आहार में मकई के अधिक सेवन के à¤à¥€ नà¥à¤•सान हैं। इसलिà¤, इसका सेवन हमेशा बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को सीमित मातà¥à¤°à¤¾ में ही करवाना चाहिà¤à¥¤ वहीं, अगर इसके सेवन से बचà¥à¤šà¥‡ को किसी à¤à¥€ तरह की कोई à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ या समसà¥à¤¯à¤¾ होती है, तो बिना देर किठडॉकà¥à¤Ÿà¤° से तà¥à¤°à¤‚त संपरà¥à¤• करें। हम उमà¥à¤®à¥€à¤¦ करते हैं कि इस लेख में बताठगठमकई के फायदे और नà¥à¤•सान के बारे में आप अचà¥à¤›à¥‡ से जान गठहोंगे। अगर आपको ये लेख पसंद आया हो, तो इसे अपने दोसà¥à¤¤à¥‹à¤‚ और करीबियों के साथ जरूर शेयर करें।
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